गर्मियों में भी सूर्योदय से ठीक पहले का समय उम्मीद से ज्यादा ठंडा लग सकता है, क्योंकि जमीन, पौधे और दूसरी सतहें दिन भर जमा हुई गर्मी रात में धीरे-धीरे छोड़ती रहती हैं। सबसे पहले ठंडक जमीन के पास वाली हवा में बढ़ती है, इसलिए घास, मिट्टी और बेंच जैसी चीजें ऊपर की हवा से ज्यादा ठंडी महसूस हो सकती हैं.
स्पष्टीकरण
सूर्यास्त के बाद सतह को सूरज से नई ऊर्जा मिलनी बंद हो जाती है, लेकिन वह अपनी गर्मी आकाश की ओर खोती रहती है। साफ और शांत रात में यह ठंडा होना ज्यादा तेज होता है, और जमीन के पास की पतली हवा की परत धीरे-धीरे और ठंडी होती जाती है। इसी वजह से दिन का सबसे कम तापमान अक्सर आधी रात को नहीं, बल्कि सूर्योदय से ठीक पहले दर्ज होता है, जब ठंडा होने की प्रक्रिया सबसे लंबे समय तक चल चुकी होती है.
विवरण
यह असर साफ आसमान, हल्की हवा और शुष्क वातावरण में सबसे ज्यादा दिखता है। बादल कुछ हद तक कंबल की तरह गर्मी को रोक लेते हैं, जबकि हवा बहने से ठंडी हवा सतह के पास जमा नहीं हो पाती। घाटियों में ठंडी हवा नीचे की ओर बहकर रुक सकती है, इसलिए निचले इलाकों में भोर ज्यादा ठंडी लग सकती है। झीलों, नदियों या घने शहरों के पास सुबह की ठंडक अक्सर कम महसूस होती है, क्योंकि पानी, कंक्रीट और डामर गर्मी को धीरे-धीरे छोड़ते हैं.
जानने लायक बातें
- ओस रात की ठंडक की वजह से बनती है: जब सतह काफी ठंडी हो जाती है, तो जलवाष्प घास और पत्तियों पर संघनित होने लगता है.
- सूर्योदय होते ही सब कुछ तुरंत गर्म नहीं हो जाता: सूरज निकलने के बाद भी जमीन और सतह के पास की हवा को दोबारा गरम होने में समय लगता है.
- शहरों में भोर अक्सर थोड़ी कम ठंडी लगती है: सड़कें और इमारतें दिन की गर्मी जमा करके रखती हैं, इसलिए रात की ठंडक वहां आम तौर पर कमजोर रहती है.

