हम अक्सर जम्हाई तब लेते हैं जब शरीर एक अवस्था से दूसरी अवस्था में जा रहा होता है: नींद से चौकन्नेपन की ओर, ऊब से ध्यान की ओर, या इसके उलट। यह सिर्फ गहरी सांस नहीं है, बल्कि जबड़े, चेहरे और छाती से जुड़ी एक छोटी शारीरिक प्रतिक्रिया है.
स्पष्टीकरण
वैज्ञानिकों के पास अभी तक इस बात का एक ही अंतिम जवाब नहीं है कि हम जम्हाई क्यों लेते हैं, लेकिन कुछ विचारों को काफी समर्थन मिलता है। जम्हाई का संबंध ध्यान बदलने, तंत्रिका तंत्र की सक्रियता को संतुलित करने और संभवतः मस्तिष्क के तापमान को नियंत्रित करने से जोड़ा जाता है। यही वजह है कि यह सोने से पहले, जागने के बाद, लंबे उबाऊ काम के दौरान या किसी महत्वपूर्ण काम से ठीक पहले दिखाई दे सकती है.
विवरण
जम्हाई संक्रामक भी होती है। किसी और को जम्हाई लेते देखना, उसके बारे में सुनना या सिर्फ उसकी कल्पना करना भी दिमाग में वही प्रतिक्रिया शुरू कर सकता है। शोधकर्ता इसे सामाजिक ध्यान और दूसरों की स्थिति को महसूस करने की क्षमता से जोड़ते हैं। संक्रामक जम्हाई केवल इंसानों में ही नहीं, कुछ अन्य सामाजिक प्राणियों में भी देखी जाती है। साथ ही, हर जम्हाई का मतलब थकान नहीं होता। लोग भाषण, कसरत या किसी तनावभरे क्षण से पहले भी जम्हाई ले सकते हैं, जब शरीर खुद को संतुलित करने की कोशिश कर रहा होता है.
जानने लायक बातें
- जम्हाई सिर्फ "दिमाग में ऑक्सीजन भरने" के लिए नहीं होती: यह पुरानी लोकप्रिय व्याख्या अब मुख्य कारण नहीं मानी जाती.
- यह अक्सर बदलाव के पलों में दिखती है: सोने से पहले, जागने के बाद या लंबे समय तक एक ही काम करते रहने पर.
- जम्हाई के बारे में पढ़ना भी काफी हो सकता है: कभी-कभी सिर्फ इसके बारे में सोचना ही आपको जम्हाई दिला देता है.

